समास विग्रह ट्रिक और उदाहरण भाग (2)
समास विग्रह ट्रिक और उदाहरण भाग (2)
समास विग्रह ट्रिक और उदाहरण भाग (2)
समास विग्रह ट्रिक और उदाहरण भाग (2)

(3) कर्मधारय समास को पहचाने TRICK & Tips:

 
– सभी पद समानाधिकरण होते हैं।
प्रथम पद विशेषण होता है
दूसरा पद विशेष्य होता है
–  विशेषण उसे कहते हैं, जो किसी की विशेषता बताये और विशेष्य वह है जिसकी विशेषता बतायी जा रही है   विशेष्य संज्ञा है
– कर्मधारय समास उपमान और उपमेय से मिलकर बनते हैं
प्र उपसर्ग वाले शब्द भी कर्मधारय समास बनाते हैं जैसे:
? प्रसंग, प्राचार्य, प्रगति… इत्यादि
 
कर्मधारय समास के उदाहरण:
 
(1) नीलाम्बर=       नील      +   अम्बर 
                            ?              ?
                            विशेषण +   विशेष्य
 
    (2) मृग लोचन=   मृग के समान लोचन 
                                 ?                   ?
                                   उपमान    +   उपमेय
 
 
(3) महादेव                         
 
(4) महात्मा
 
(5) चरण कमल 
 
(6) पीताम्बर 
 
(7) पीत सागर 
 
(8) चन्द्र मुख 
 
(9) परमेश्वर 
 
(10) पुत्ररत्न
 
(11) महापुरुष 
 
(12) नीलोत्पल 
 
(13) सज्जन 
 
(14) नरसिंह
 
(15) घनश्याम
 
(16) सदभावना
 
(17) पद पंकज

समास विग्रह ट्रिक और उदाहरण भाग(2)

(4) द्विगु समास को पहचाने TRICK & Tips:
 
पहलापद संख्यावाची होता है
दूसरा पद संज्ञा होता है
– द्विगु समास समूह में होता है यह कर्मधारय समास का भी एक प्रकार है
? द्विगु समास में पहला पद संख्यात्मक विशेषण होता है
 
द्विगु समास के उदाहरण:
 
त्रिलोक        –    तीन लोकों  का समूह
पंचवटी        –    पांच वटों का समूह
चौराहा         –    चार राहों का समूह
सतसई         –    सात सौ का समूह
नवग्रह          –    नौ ग्रहों का समूह
त्रिभुवन         –    तीन भुवनों का समूह
पंचपात्र         –    पांच पात्रों का समूह
त्रिफला         –    तीन फलों का समूह
चतुर्युग         –    चार युगों का समूह
 
 
(5) द्वंद्व  समास को पहचाने TRICK & Tips:
 
 द्वंद्व समास में सभी पद प्रधान होते हैं अर्थात् दोनों पद समान होते हैं
 
द्वंद्व समास के तीन भेद होते हैं:
 
(1) इतरेतर द्वंद्व समास -इस प्रकार के समास में सभी पद स्वतंत्र होते हैं बीच में और छिपा होता है
 जैसे:- भाई-बहन , माता-पिता आदि
(2) समाहार द्वंद्व समास – इस समास में बीच में और छिपा होने के बाद भी अलग-अलग ना होकर समूह का     बोध कराते हैं
    जैसे:- हाथ-पाँव, दाल-रोटी आदि
(3) वैकल्पिक द्वंद्व समास – इस प्रकार के समास में बीच में  ‘या’ एवं  ‘अथवा’ छिपा होता है
     जैसे:- कम-ज्यादा , ठंडा-गरम इत्यादि
 
द्वंद्व समास के उदाहरण:
 
पाप -पुण्य
सीता – राम
दाल – रोटी
भला – बुरा
राम – कृष्ण
ठण्डा – गरम
भाई – बहन
गौरी – शंकर
देवासुर
थोडा – बहुत
रूपया – पैसा
देश – विदेश
घर – द्वार
नाक – कान
दस – बारह
ऊँच – नीच
 
(5) बहुब्रीहि समास को पहचाने TRICK & Tips:
 
– बहुब्रीहि समास में  दोनों ही पदों में कोई भी पद प्रधान नही होता कोई अन्य पद  ही प्रधान हो जाता 
    है
समस्त पद अन्य के रूप में प्रयुक्त होते हैं
 
?(सुपर  Tricks): बहुब्रीहि समास की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है,उसके विग्रह में ऐसे शब्द होते हैं जिससे हमें आसानी से पता चल जाता है की यह 100% बहुब्रीहि समास है
Tricks-जिसका-वह ,जिसके-वह, जो-वहऔर स (साथ) के अर्थ में प्रयुक्त  होता है मतलब पहला पद स हो जैसे- सपरिवार

समास विग्रह के उदाहरण

 
बहुब्रीहि समास के उदाहरण:
 
पीताम्बर – पीत है अम्बर जिसका
चन्द्रमौली – चन्द्र है मौली पर जिसके
गोपाल –      वह जो, गौ का पालन करे
वीणापाणि – वीणा है पाणि में जिसके
दशानन –     दस है आनन जिसके
दिगम्बर –     दिक् है अम्बर जिसका
चतुरानन –    चार है आनन जिसके
लम्बोदर –     लम्बा है उदर जिसका
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